बाल श्रम पर निबंध

Child Labour Essay in Hindi बालश्रम का तात्पर्य उस कार्य से है, जिसे करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु से छोटा हो |बालश्रम एक ऐसा सामाजिक अभिशाप है, जो शहरों में, गांव में, एवं चारों और मकड़जाल की तरह बचपन को अपने आगोश में लिए हुए हैं| खेलने-कूदने के दिनों में कोई बच्चा श्रम करने को मजबूर हो जाए तो, इससे बड़ी विडंबना किसी भी समाज के लिए भला और क्या हो सकती है| बालश्रम से परिवारों को आए स्त्रोतों का केवल एक छोटा सा भाग ही प्राप्त होता है, जिसके लिए गरीब परिवार अपने बच्चों के भविष्य को गर्त में झोंक देते हैं| बालश्रम मानवाधिकारों का हनन है| मानव अधिकारों के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास का हक पाने का अधिकार है, लेकिन यथार्थ में स्कूल, खेल, प्यार-स्नेह, आत्मीयता आदि इनकी कल्पना में ही रह जाते हैं|

Child Labour Essay in Hindi 200 Words

बालश्रम का प्रारंभ औद्योगिक क्रांति की शुरुआत से ही माना जाता है| कार्ल मार्क्स ने कम्युनिस्ट घोषणापत्र में कारखानों में मौजूदा स्वरुप में बाल श्रम के त्याग की बात कही थी| 1990 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका एवं सोमालिया को छोड़कर अन्य सभी देशों ने बाल अधिकार सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर  किए| यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुकानों, कारखानों, ईंट-भट्ठों एवं खदानों के साथ-साथ घरेलू कार्यों में  विश्वभर में करोड़ों की संख्या में बाल श्रमिक कार्यरत हैं, किंतु सभी मामलों में बाल श्रमिकों का शोषण नहीं होता, कई बार तो उनके द्वारा किए गए श्रम उनके और उनके परिवार वालों के लिए हितकर भी होते हैं|

बांग्लादेश में 55,000 से भी ज्यादा बाल श्रमिक के वस्त्र उद्योग में कार्यरत हैं, जिनकी बदौलत यह देश अमेरिका को लगभग 75 करोड़ डॉलर के वस्त्र निर्यात करता है, किंतु अमेरिका द्वारा बाल श्रम कानून लागू किए जाने और बाल श्रमिको द्वारा तैयार किए गए माल पर प्रतिबंध लगाया जाने पर बांग्लादेश में 75% बाल श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उनके साथ-साथ उनके परिवार वालों के सामने भुखमरी की स्थिति आ पहुँची | बावजूद इसके आज दुनिया के संपन्न देशों में बाल श्रम को मानव अधिकार का उल्लंघन मान इस पर कानून प्रतिबंध लगा दिया गया है | संयुक्त राज्य अमेरिका में बालश्रम कानून के अंतर्गत किसी भी प्रतिष्ठान में कार्य करने की न्यूनतम आयु 16 वर्ष है| संयुक्त राष्ट्र संघ एवं राष्ट्रीय संस्थान द्वारा वर्ष 1979 को अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस के रुप में मनाया गया था|

Child Labour Essay in Hindi
बाल श्रम पर निबंध – Child Labour Essay in Hindi

Child Labour Essay in Hindi 300 Words

वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, भारत में बाल श्रमिकों की संख्या लगभग 1.3 करोड़ थी | यहां अधिकांश बाल श्रमिक ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत हैं| उनमें से लगभग 60% 10 वर्ष की आयु से कम है| व्यापार एवं व्यवसाय में 23% बच्चे संग्लन हैं, जबकि 36% बच्चे घरेलू कार्य में| शहरी क्षेत्रों में उन बच्चों की संख्या अत्याधिक, जो कैंटीन एरिया में काम करते हैं या चिथड़े उठाने एवं सामानों की फेरी लगाने में संग्लन है, लेकिन वह रिकॉर्ड में नहीं है| अधिक बदकिस्मत बच्चे वे हैं, जो जोखिम वाले उद्यमों में कार्यरत हैं| कितने ही बच्चे हानिकारक प्रदूषित कारखानों में काम करते हैं, जिनकी ईंट की दीवार पर कालिख जमी रहती है और जिनकी हवा में विषद्जनक बू होती है|

वे ऐसी भठियों के पास काम करते हैं, जो 1200 डिग्री सेल्सियस ताप पर जलती हैं| वे आर्सेनिक और पोटेशियम जैसे खतरनाक रसायनों को काम में लेते हैं| वह कांच-धमन की इकाइयों में कार्य करते हैं, जहां उनके फेफड़ों पर जोर पड़ता है, जिससे तपेदिक जैसी बीमारियां होती हैं| कई बार ऐसा भी होता है कि उनके बदन में दर्द होता है, दिमाग परेशान रहता है, उनका दिल रोता है और आत्मा दुखी रहती है, लेकिन तब भी अपने मालिकों के आदेश पर उन्हें 12 से 15 घंटे लगातार काम करना पड़ता है| कूड़े के ढेर में से रिसाइक्लिंग के लिए विभिन्न सामग्री इकट्ठा करने वाले बच्चों में समय से पूर्व ही कई खतरनाक और संक्रामक बीमारियां घिर कर जाती है, जिनसे बचपन और जवानी का होने पता ही नहीं चल पाता और उनके कदम सीधे बुढ़ापे में भी चले जाते हैं|

Child Labour Essay in Hindi Language
बाल श्रम पर निबंध – Child Labour Essay in Hindi Language

भारत में बालश्रम के प्रमुख कारणों में निर्धनता, अशिक्षा, बेरोजगारी, कम आय की प्राप्ति आदि है| जहां 40% से अधिक लोग गरीबी से जूझ रहे हैं| ऐसी स्थिति में बच्चे बालश्रम करके अपना और अपने माता-पिता का पेट भरते हैं| उनकी कमाई के बिना उनके परिवार का जीवन स्तर और गिर सकता है|

Child Labour Essay in Hindi 400 Words

भारत में जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अशिक्षित है, जिसके दृष्टिकोण में शिक्षा ग्रहण करने से अधिक आवश्यक है धन कमाना, जिससे बाल श्रम को बढ़ावा मिलता है| बड़ा और संयुक्त परिवार होने से परिवार के कम ही लोगों को रोजगार मिल पाता है, फलस्वरूप बच्चों को काम करने के लिए विवश होना पड़ता है| इसके अतिरिक्त समाज के स्वार्थी तत्वों और गलत तरीकों से आर्थिक हितों की पूर्ति करने वाले व्यावसायिक संगठनों के द्वारा जान-बूझकर प्रतिकूल स्थिति पैदा कर दी जाती है, ताकि उन्हें सस्ती मजदूरी पर बिना विरोध के काम करने वाले बाल श्रमिक आसानी से मिल जाए|

भारत के संविधान में बालश्रम को रोकने या हतोत्साहित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएँ की गई है जैसे 14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने में काम करने के लिए या किसी जोखिम वाले रोजगार में नियुक्त नहीं किया जाएगा (धारा -24), बाल्यावस्था और किशोरावस्था को शोषण तथा नैतिक एवं भौतिक परित्यक्ता से बचाया जायेगा (धारा -39 Af ),  संविधान के प्रारंभ होने से 10 वर्षो की अवधि में सभी बालकों की, जब तक वे 14 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेते हैं, राज्य निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करने का प्रत्यन करेगा (धारा -39 AF) आदि|

वर्ष 1949 में सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी श्रमिकों के कार्य करने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई| भारत सरकार ने वर्ष 1979 में बालश्रम समस्याओं से संबंधित अध्ययन हेतु गुरुपाद स्वामी समिति का गठन किया, जिसके सुझाव पर बालश्रम अधिनियम 1986 लागू किया गया| यह पहला विस्तृत कानून है, जो 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को व्यवस्थित उद्योगों एवं अन्य कठिन औद्योगिक व्यवसायों:- जैसे बीड़ी, कालीन, माचिस, आतिशबाजी आदि के निर्माण में रोजगार देने पर प्रतिबंध लगाता है|

वर्ष 1987 में राष्ट्रीय बालश्रम नीति तैयार की गई, जिसके अंतर्गत जोखिम भरे व्यवसायों में कार्यरत बच्चों के पुनर्वास पर जोर दिया गया| वर्ष 1996 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले ने बालश्रम के विरुद्ध कार्रवाई में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें संघीय एवं राज्य सरकारों को जोखिम भरे व्यवसायों में काम करने वाले बच्चों की पहचान करने, उन्हें काम से हटाने  एवं शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था| केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 28 अगस्त 2012 को बालश्रम अधिनियम, 1986 में संशोधन को मंजूरी दी गई|

Child Labour Essay in Hindi 500 Words

इस अधिनियम में संशोधन के द्वारा गैर-जोखिम भरे कार्यों में भी 14 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को लगाने पर पूर्णत:  प्रतिबंध लगाया गया है| इससे पूर्व 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों से सिर्फ जोखिम भरे व्यवसायों में कार्य कराने पर ही प्रतिबंध था| संशोधित अधिनियम के अनुसार, 14 से 18 वर्ष की आयु वालों को किशोर की श्रेणी में रखा गया और जोखिम वाले उद्योग धंधों में काम करने वालों की न्यूनतम आयु 14 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है| इसमें बालश्रम का संघये अपराध कानून के उल्लंघन करने पर अधिकतम सजा 1 वर्ष से बढ़ाकर 2 वर्ष, साथ ही साथ जुर्माने की रकम 20000 से बढ़ाकर 50000 कर दी गई है| बावजूद इन सबके हमारे देश में बाल श्रमिकों की संख्या आज भी करोड़ों में है|

भारतवर्ष से बालश्रम को पूर्णत: समाप्त करने का संकल्प लेने वाले वर्ष 2014 के नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी के शब्दों में “इससे बड़ी त्रासदी और भला क्या होगी कि देश में आज भी 17 करोड़ बाल श्रमिक और लगभग 20 करोड़ वयस्क बेरोजगार हैं| ये वयस्क कोई और नहीं, बल्कि बाल श्रमिकों की माता पिता ही है| वास्तव में, यह विरोधाभास बालश्रम के खत्म होने से ही समाप्त हो पाएगा|” बालश्रम को बच्चों के विरूद्ध हिंसा मानने वाले श्री कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि सामूहिक कार्यों, राजनीतिक इच्छाशक्ति, पर्याप्त संसाधन और वंचित बच्चों के प्रति पर्याप्त सहानुभूति से बालश्रम समाप्त किया जा सकता है| इन्होंने बालश्रम मिटाने हेतु लोगों का आव्हान करते हुए यह नारा भी दिया “सहानुभूति का वैश्वीकरण, सूचना का लोकतांत्रिकरण और अधिकारों का सर्वव्यापीकरण|”

Essay on Child Labour in Hindi
बाल श्रम पर निबंध  – Essay on Child Labour in Hindi

वास्तव में, हम यह सोचते हैं कि इस तरह की समाज की कुरीतियों को समाप्त करने का दायित्व सिर्फ सरकार का है| सब कुछ कानूनों के पालन एवं कानून भंग करने वालों को सजा देने से सुधारा जाएगा, लेकिन यह असंभव है| हमारे घरों में, ढाबों में, होटलों में अनेक श्रमिक मिल जाएंगे जो, कड़ाके की ठंड या तपती धूप की परवाह किए बगैर काम करते हैं| सभ्य होते समाज में या अभिशाप आज भी क्यों बरकरार है? क्यों तथाकथित सभ्य एवं सुशिक्षित परिवारों में नौकरों के रूप में छोटे बच्चों को पसंद किया जाता है| हमें इन सब प्रश्नों के उत्तर स्वयं से पूछने होंगे|

हमें इन बच्चों से बालश्रम न करवाकर इन्हें प्यार देना होगा, जिनके लिए विलियम वर्ड्सवर्थ ने कहा था “द चाइल्ड इस द फादर ऑफ द मैन” अर्थात बच्चा ही व्यक्ति का पिता है| हमें भी निंदा फाजली की तरह ईश्वर की पूजा समझकर बच्चों के दुख को दूर करना होगा| आज हम 21वीं सदी में विकास और उन्नति की ऐसी व्यवस्था में जी रहे हैं, जहां समानता, धर्मनिरपेक्षता, मान्यता आदि की चर्चा बहुत जोर-शोर से की जा रही है|

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