कन्या-भ्रूण हत्या पर निबंध

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Kanya Bhrun Hatya Essay 100 Words

कन्या भ्रूण हत्या आज एक ऐसी अमानवीय समस्या का रुप धारण कर चुकी है, जो कई और गंभीर समस्याओं की भी जड़ है| इसके कारण महिलाओं की संख्या दिन-प्रतिदिन घट रही है| भारत में वर्ष 1901 में प्रति 1000 पुरुषों पर 972 महिलाएं थी, वर्ष 1991 में महिलाओं की यह संख्या घटकर 927 हो गई| वर्ष 1991-2011 के बीच महिलाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई| वर्ष 2011 की जनगणना में प्रति हजार पुरुषों पर 940 महिलाएं हो गई| सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से देखें, तो यह वृद्धि पर्याप्त नहीं है| नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2013 में भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कुल 217 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक 69 मध्य प्रदेश से, 34 राजस्थान से और 21 हरियाणा से संबंधित थे|

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कन्या-भ्रूण हत्या पर निबंध – Kanya Bhrun Hatya Essay in Hindi Language

Kanya Bhrun Hatya Essay 200 Words

वर्ष 2012 में हरियाणा सरकार द्वारा कन्या भ्रूण-हत्या की सही-सही जानकारी देने वालों को 20 हजार के पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई| बावजूद इसके वर्ष 2013 में केवल तीन व्यक्तियों के द्वारा ही स्वास्थ्य विभाग प्राधिकरण को ऐसी जानकारी दी गई| भारत में 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग वाले बच्चों के लिंगानुपात की स्थिति सबसे दयनीय है|

वर्ष 2011 में हरियाणा में प्रति हजार लड़कों पर केवल 834 लड़कियां थी, किंतु वर्ष 2013 में लड़कियों की यह संख्या थोड़ी बढ़कर 900 तक जा पहुंची| इन आंकड़ों को देखकर हम यह सोचने के लिए विवश हो जाते हैं कि क्या हम वही भारतवासी हैं, जिनके धर्मग्रंथ-यंत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता: अर्थात जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है, जैसी बातों से भरे पड़े हैं| संसार का हर प्राणी जीना चाहता है और किसी भी प्राणी के प्राण लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है, पर अन्य प्राणियों की बात कौन करे, आज तो बेटियों की जिंदगी कोख में ही छीनी जा रही है|

भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कई कारण हैं| प्राचीनकाल में भारत में महिलाओं को भी पुरुषों के समान शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध है थे,किंतु विदेशी आक्रमण हो एवं अन्य कारणों से महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित किया जाने लगा है, समाज में पर्दा प्रथा और सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं व्याप्त हो गई|

Kanya Bhrun Hatya Essay 300 Words

महिलाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध नहीं होने का कुप्रभाव समाज पर भी पड़ा| लोग महिलाओं को अपने सम्मान का प्रतीक समझने लगे| धार्मिक एवं सामाजिक रूप से पुरुषों को अधिक महत्व दिया जाने लगा एवं महिलाओं को घर की चारदीवारी तक ही सीमित कर दिया गया| इसके कारण संतान के रूप में नर्सों की कामना करने की गलत परंपरा समाज में विकसित हुई| युवाअवस्था में प्रेम के फलस्वरुप गर्भधारण को हमारा समाज पाप मानता है| जिस परिवार की किशोरी ऐसा करती है, समाज में उसकी निंदा जाती है| इसके अतिरिक्त यौन संबंध बनाने की स्थिति में भी महिलाओं की ही निंदा अधिक की जाती है|

इसे समाज ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है| इन्हीं कारणों से लोग चाहते हैं कि भविष्य में अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की किसी आशंका से बचने के लिए वे सिर्फ नर शिशु को ही जन्म दे| कोई भी महिला अपनी गर्भस्थ  संतान को मारना नहीं चाहती, भले  ही वह कन्या शिशु ही क्यों ना हो, लेकिन परिजन विभिन्न कारणों से उसे ऐसा करने के लिए बाध्य करते हैं| भारतीय नारियां तो अपनी कन्याओं को जीवन भर समस्याओं का दृढ़तापूर्वक सामना करने की सीख देती है|

कन्या भूर्ण हत्या का एक बड़ा कारण दहेज प्रथा भी है| लोग लड़कियों को पराया धन समझते हैं, उनकी शादी के लिए दहेज की व्यवस्था करनी पड़ती है| दहेज जमा करने के लिए कई परिवारों को कर्ज भी लेना पड़ता है, इसलिए भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए लोग गर्भावस्था में ही लिंग परीक्षण करवाकर कन्या भूर्ण होने की स्थिति में उसकी हत्या करवा देते हैं| हमारे समाज में महिलाओं से अधिक पुरुषों को महत्व दिया जाता है, परिवार का पुरुष सदस्य ही परिवार के भरण -पोषण के लिए धनोपार्जन करता था| अभी भी कामकाजी महिलाओं की संख्या बहुत कम है| उन्हें सिर्फ घर के कामकाज तक सिमित रखा जाता है|

Kanya Bhrun Hatya Essay 400 Words

संविधान द्वारा महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने के बाद भी उनके प्रति सामाजिक भेदभाव में कमी नहीं हुई है, इसलिए परिवार के लोग भविष्य में परिवार की देखभाल करने वाले के रूप में नर शिशु की कामना करते हैं| भारतीय समाज में यह अवधारणा रही है कि वंश पुरुष से ही चलता है, महिलाओं से नहीं इसलिए सभी लोग अपने-अपने वंश परंपरा को कायम रखने के लिए पुत्र की चाह रखते हैं| उसे पुत्री की तुलना में अधिक लाड प्यार देते हैं किंतु वह भूल जाते हैं कि उनकी पुत्री भी आगे चलकर मदर टेरेसा, पीटी उषा, लता मंगेशकर, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स आदि बनकर उनके कुल और देश का गौरव बन सकती हैं|

भारत में वर्ष 2004 में पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू कर भ्रूण हत्या को अपराध घोषित कर दिया गया| इसके बाद भी कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण नियंत्रण नहीं हो सका| लोग चोरी छिपे पैसे के बल पर इस कुकृत्य को अंजाम देते हैं| कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अभिशाप है और इसे रोकने के लिए लोगों को जागरुक करना होगा| महिलाओं को आत्मनिर्भर बना कर ही इस कृत्य को रोका जा सकता है|

कानून तब तक कारगर नहीं होता, जब तक कि उसे जनता का सहयोग ना मिले| जनता के सहयोग से ही किसी अपराध को रोका जा सकता है| कन्या भ्रूण हत्या एक ऐसा अपराध है इसमें परिवार हैं समाज के लोगों की भागीदारी होती है, इसलिए जागरुक नागरिक की ही इस कुकृत्य को समाप्त करने में विशेष भूमिका निभा सकते हैं| सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन समाज से इस कलंक मिटाने के लिए प्रयासरत है| इस कार्य में मीडिया भी अपनी सशक्त भूमिका निभा रहा है, आवश्यकता बस इस बात की है कि जनता भी अपने कर्तव्य को समझते हुए कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक कलंक मिटाने में समाज का सहयोग करें| सच ही कहा गया है आज बेटी नहीं बचाओगे तो कल मां कहां से पाओगे|

किसी भी देश की प्रकृति तब तक संभव नहीं है, जब तक वहां की महिलाओं को प्रगति के पर्याप्त अवसर ना मिलें| जिस देश में महिलाओं का अभाव हो, उसके विकास की कल्पना भला कैसे की जा सकती है| कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण कर इसे समाप्त करने में महिलाओं की भूमिका सार्वधिक महत्व हो सकती है, किंतु साक्षर महिला ही अपने अधिकारों की रक्षा कर पाने में सक्षम होती है, इसलिए हमें महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा| महिला परिवार की धुरी होती है| समाज के विकास के लिए योग्य माताओं, बहनों एवं पत्नियों का होना अति आवश्यक है| यदि महिलाओं की संख्या में कमी होती रही तो सामाजिक संतुलन बिगड़ जाएगा हैं समाज में बलात्कार, व्यभिचार इतिहास की घटनाओं में वृद्धि होने लगेगी|

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